चांपा (ऐश्वर्य सीजी24 न्यूज) आपको बता दे कि, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देने वाले भारत की आजादी के लिए सर्वत्र निछावर करने वाले नेता सुभाष चंद्र बोस भारत के प्रत्येक नागरिक का आदर्श महापुरुष माने जाते है और इस महानता को विद्यार्थी परिषद जैसा संगठन भी आत्मसात करके चलता है इसी के चलते चांपा नगर के मध्य कभी अखराघाट के नाम पर प्रसिद्ध स्थल को विद्यार्थी परिषद ने सन 23/ 1/ 1991 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश नंद गोस्वामी जी के कर कमलो से मुख्य आतिथ्य में शिलान्यास कर सुभाष चौक का नाम बाकायदा नेता जी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाकर इसका अनावरण भी किया गया और नगर पालिका के दस्तावेज में यह सुभाष चौक के नाम से अंकित भी है किंतु इसे तथाकथित व्यक्ति द्वारा किया गया दुस्साहस कहा जाए या फिर नगर का दुर्भाग्य या कहें नगर पालिका के उदासीनता इस जगह को सुभाष चौक होने के बाद भी तथाकथित लोगों द्वारा दीवारों पर दुकान के होल्डिंग बोर्ड पर मोदी चौक लिख कर प्रचारित प्रसारित किया जाता रहा जिसके फलस्वरुप मौखिक रूप से इस स्थल को मुंह जुबानी लोगों द्वारा मोदी चौक कहा जाता है जो कि नेता सुभाषचंद्र बोस के महानता प्रतीक चौक का सीधा-सीधा अपमान है।
इस संबंध में आसपास के लोगों से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वह किसी मोदी को यहां पर नहीं जानते और यदि मोदी चौक कहा जाता है तो कौन मोदी है जिसके नाम पर यह चौक है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। गौरतलब हो कि जब से चौक का नाम नेता जी सुभाष चंद्र बोस के नाम से हुआ है तब से यहां 15 अगस्त 26 जनवरी व नेता जी की जयंती पर विद्यार्थी परिषद द्वारा प्रतिमा पर पुष्प माल्यार्पण कर नेता जी को श्रद्धांजलि दी जाती है किंतु सिर्फ इन दिनों के बाद उक्त स्थल को भुला दिया जाता है धूल खाए हुए किनारे स्थित यह प्रतिमा अपने सामने इस चौंक को अन्य नाम से पुकारे जाने पर शर्मिंदगी महसूस कर रहा हो ऐसा प्रतीत होता हैl इस चौक का नामकरण के साथ मूर्ति अनावरण मुख्य आतिथ्य में किया गया था और अगर इस जगह को सुभाष चौक के अलावा कोई और चौक के नाम से किसी के द्वारा लिखा कहा जाता है तो यह अनुचित हैl ज्ञात हो कि नगर में किसी भी चौक चौराहे गली मार्ग का नाम मनमाने ढंग से लोगों द्वारा बोर्ड लगाकर घोषित कर दिया जाता है और यह लोगों के जुबानी प्रचलन में आ जाता है जबकि सरकारी दस्तावेज में उक्त गली चौक का नाम अलग ही होता है इस तरह का प्रचलन उन महापुरुषों का अपमान है जिनका नामकरण लोगों की सहमति के आधार पर शासन के द्वारा विधि विधान से किया गया होता है अब देखना होगा नगर के मध्य स्थित सुभाष चौक बनाम मोदी चौक के बीच के इस विवाद को प्रशासन किस तरह से कार्रवाई के माध्यम से पूर्ण रूप से समाप्त कर पता है या नहीं यह आने वाले समय में पता चलेगा किंतु इतना जरूर है कि भारत के उस महान सपूत सुभाष चंद्र बोस जी के चौक नामकरण के बाद किसी और का नाम लिया जाना क्या उचित माना जा सकता है जनमानस का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि आसपास के दीवार बोर्ड में लगे हुए मोदी जैसे शब्द को विलोपित करने का आदेश पारित कर उक्त स्थल के आसपास नेताजी सुभाष चौक स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए l








