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बद्रीनाथ- VIP दर्शन से 1.63 करोड़ की आय पर विवाद:उपाध्यक्ष बोले- बिना बोर्ड मंजूरी के शुल्क लागू किया; चढ़ावा के बाद दो नए मामले चर्चा में

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा हेराफेरी विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब दो नए वित्तीय मामले चर्चा में आ गए हैं। पहला मामला VIP दर्शन के लिए प्रति श्रद्धालु 1100 रुपए शुल्क वसूलने का है, जिससे अब तक करीब 1.63 करोड़ रुपए जमा होने का दावा किया जा रहा है। दूसरा मामला VIP मेहमानों के ठहर

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Dainik Bhaskar
Wire Service··7 min read·Via Dainik Bhaskar
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बद्रीनाथ- VIP दर्शन से 1.63 करोड़ की आय पर विवाद:उपाध्यक्ष बोले- बिना बोर्ड मंजूरी के शुल्क लागू किया; चढ़ावा के बाद दो नए मामले चर्चा में
बद्रीनाथ- VIP दर्शन से 1.63 करोड़ की आय पर विवाद:उपाध्यक्ष बोले- बिना बोर्ड मंजूरी के शुल्क लागू किया; चढ़ावा के बाद दो नए मामले चर्चा में

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा हेराफेरी विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब दो नए वित्तीय मामले चर्चा में आ गए हैं। पहला मामला VIP दर्शन के लिए प्रति श्रद्धालु 1100 रुपए शुल्क वसूलने का है, जिससे अब तक करीब 1.63 करोड़ रुपए जमा होने का दावा किया जा रहा है। दूसरा मामला VIP मेहमानों के ठहरने और खानपान के नाम पर कथित फर्जी बिल बनाए जाने का है। दोनों मामलों को लेकर श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बोर्ड की मंजूरी के बिना शुल्क लागू करने पर सवाल उठाए हैं, जबकि CEO सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि यह व्यवस्था भीड़ नियंत्रण और अनधिकृत वसूली रोकने के लिए लागू की गई थी। जून के अंतिम सप्ताह से लागू हुई व्यवस्था चारधाम यात्रा के पीक सीजन में बद्रीनाथ धाम में रोज हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे थे। इसी दौरान कुछ श्रद्धालुओं को सामान्य कतार से अलग विशेष व्यवस्था के तहत दर्शन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए प्रति व्यक्ति 1100 रुपए शुल्क लिया गया और आधिकारिक रसीद भी जारी की गई। विवाद तब शुरू हुआ जब यह सवाल उठा कि इस शुल्क को लागू करने से पहले BKTC बोर्ड से औपचारिक मंजूरी ली गई थी या नहीं। CEO बोले- पारदर्शिता के लिए किया व्यवस्थित BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि VIP दर्शन शुल्क कोई नई व्यवस्था नहीं थी, बल्कि पहले से चली आ रही प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया। उनके अनुसार यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में लोग विभिन्न माध्यमों से प्रोटोकॉल या VIP श्रेणी में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे सामान्य श्रद्धालुओं की कतार और भीड़ प्रबंधन प्रभावित होता है। रांगड़ ने कहा कि इसी वजह से मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत शुल्क आधारित व्यवस्था लागू की गई, ताकि VIP प्रोटोकॉल का अनावश्यक उपयोग रोका जा सके और भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ बाहरी लोग दिव्यांग और अन्य विशेष श्रेणियों का दुरुपयोग कर श्रद्धालुओं से पैसे लेकर वैकल्पिक रास्तों से दर्शन करा रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए अधिकृत और रसीद आधारित व्यवस्था लागू की गई। CEO के मुताबिक प्रत्येक श्रद्धालु को आधिकारिक रसीद जारी की गई और पूरी राशि सीधे समिति के खाते में जमा हुई है। उन्होंने दावा किया कि अब तक लगभग 1.63 करोड़ रुपए समिति के खाते में जमा हो चुके हैं और पूरी प्रक्रिया दस्तावेजों में दर्ज है। उपाध्यक्ष का आरोप- बोर्ड से मंजूरी नहीं ली गई BKTC के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि VIP दर्शन शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पारित नहीं हुआ। सती के अनुसार मंदिर समिति के नियमों के तहत किसी भी नए शुल्क को लागू करने या शुल्क दरों में बदलाव से पहले बोर्ड की मंजूरी आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि यह विषय न तो बोर्ड के समक्ष रखा गया और न ही उपाध्यक्ष या अन्य सदस्यों की औपचारिक सहमति ली गई। उन्होंने कहा कि यदि शुल्क लागू किया गया है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्णय किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत लिया गया। सती ने उदाहरण देते हुए कहा कि पूजा शुल्क समेत अन्य वित्तीय निर्णय हमेशा बोर्ड की मंजूरी के बाद लागू किए जाते हैं। ऐसे में VIP दर्शन शुल्क पर भी वही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उनका विरोध श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था बनाने से नहीं, बल्कि संस्थागत मंजूरी के बिना वित्तीय निर्णय लेने से है। उनके मुताबिक पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उपाध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि उनके पास ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें समिति के कुछ अतिथियों को बिना शुल्क के VIP दर्शन कराए गए। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि शुल्क किन लोगों से लिया गया और किन्हें छूट दी गई। VIP मेहमानों के नाम पर कथित फर्जी बिल VIP दर्शन शुल्क के अलावा BKTC पर VIP मेहमानों और जनप्रतिनिधियों के नाम पर कथित फर्जी बिल बनाने के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायतों के अनुसार कई नेताओं और अतिथियों के नाम पर ठहरने और खानपान का खर्च दिखाया गया, जबकि संबंधित लोगों ने दावा किया कि उन्होंने अपना खर्च स्वयं उठाया था। मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने प्रारंभिक जांच में कई भुगतानों को संदिग्ध मानते हुए विस्तृत जांच की सिफारिश की है। जांच में शामिल दस्तावेजों के अनुसार विभिन्न आवासों में VIP मेहमानों के ठहरने और खानपान से जुड़े खर्च का रिकॉर्ड भी सामने आया है। नेताओं ने खर्च दिखाने से किया इनकार जांच के दौरान विधायक आशा नौटियाल के नाम पर 37,500 रुपए और भाजपा नेत्री नेहा जोशी के नाम पर करीब 40 हजार रुपए खर्च दर्शाया गया। दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने BKTC से कोई सुविधा नहीं ली और अपना पूरा खर्च स्वयं वहन किया था। हेलीकॉप्टर कंपनी के जवाब से बढ़ा संदेह जांच के दौरान एक विशेष अतिथि के नाम पर करीब 60 हजार रुपए खर्च दर्शाया गया था। जब संबंधित एविएशन कंपनी से जानकारी मांगी गई तो कंपनी ने बताया कि यात्री का पूरा खर्च उसने स्वयं उठाया था। इसके बाद जांच समिति ने भुगतान संबंधी दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी। पूर्व कार्यकाल के फैसले भी जांच के घेरे में जांच रिपोर्ट में व्यवस्थापक को करीब छह लाख रुपए अग्रिम राशि जारी किए जाने का मामला भी सामने आया है। समिति का मानना है कि लंबित बिलों के निस्तारण के बजाय अग्रिम राशि जारी करना वित्तीय नियमों के अनुरूप नहीं था। हालांकि संबंधित अधिकारियों का कहना है कि उस समय बोर्ड का गठन नहीं हुआ था और यात्रा व्यवस्थाओं को देखते हुए तत्काल निर्णय लेने पड़े थे। बाद में बोर्ड बैठक में इन खर्चों को मंजूरी दे दी गई थी। बोर्ड से शुरू विवाद, अब खुलकर आई खींचतान दैनिक भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार BKTC उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बीच मतभेद प्रशासनिक भवन के पास एक बोर्ड लगाने के मुद्दे से शुरू हुए थे। बाद में यही असहमति प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों तक पहुंच गई। सूत्रों का दावा है कि VIP दर्शन शुल्क और अन्य मामलों को लेकर मौजूदा विवाद उसी खींचतान की अगली कड़ी है। हालांकि इस पर दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दान-चढ़ावा हेराफेरी मामले में SIT भी कर रही जांच इधर, बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच भी तेज हो गई है। चमोली पुलिस ने DSP मदन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में छह सदस्यीय SIT गठित की है। टीम बद्रीनाथ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण कर चुकी है और CCTV फुटेज तथा दस्तावेज जुटा रही है। SIT घटना वाले दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक की फुटेज खंगाल रही है और मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर रही है। इस मामले में वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और उन्हें निलंबित भी किया गया है। अब VIP दर्शन शुल्क, कथित फर्जी बिल और दान-चढ़ावा हेराफेरी तीनों मामलों की विभागीय, प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर जांच चल रही है। 'चोर चाहे कितना भी रसूखदार हो, बख्शा नहीं जाएगा' कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि सरकार किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या चोरी के मामलों में कोई नरमी नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का काम अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है और दोषियों को उनके कृत्य की सजा दिलाई जाएगी। मंत्री ने कहा कि आरोपी कौन है, उसका कितना रसूख है या उसके किससे संबंध हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि "चोर के साथ वही सुलूक होगा, जो एक चोर के साथ होना चाहिए।" ------------ ये खबर भी पढ़ें : बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद- सस्पेंड निजी सचिव पर FIR: CM बोले- यह मां-बाप की हत्या जैसा महापाप; जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनी बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेरफेर मामले में पहली बड़ी आपराधिक कार्रवाई हुई है। मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की तहरीर पर निलंबित निजी सचिव प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 और 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी खबर…

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